January 24, 2019 Secret of health is hidden in the rays of rising Sun, ( उगते सूरज की किरणों में छुपा है, सेहत का राज )

Secret of health is hidden in the rays of rising Sun, ( उगते सूरज की किरणों में छुपा है, सेहत का राज )

“श्री सूर्यदेव की पौराणिक कथा और महिमा”

सूर्य और चन्द्र इस पृथ्वी के सबसे साक्षात् देवता हैं जो हमें प्रत्यक्ष रूप में उनके सर्वोच्च दिव्य स्वरूप में दिखाई देते हैं । वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है । समस्त चराचर जगत की आत्मा सूर्य ही हैं । सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है । वैदिक काल से ही भारत में सूर्य उपासना का प्रचलन रहा है । वेदों की ऋचाओं में अनेक स्थानों में सूर्यदेव की स्तुति की गई है । पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति, प्रभाव, स्तुति मन्त्र इत्यादि विस्तार से मिलते हैं । ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में भगवान सूर्यदेव जी को राजा का पद प्राप्त है ।

श्री मार्कण्डेय पुराण के अनुसार पहले यह सम्पूर्ण जगत प्रकाश रहित था । उस समय कमलयोनि ब्रह्मा जी प्रकट हुए । उनके मुख से प्रथम शब्द ॐ निकला जो सूर्य का तेज रूपी सूक्ष्म था । तत्पश्चात ब्रह्मा जी के चार मुखों से चार वेद प्रकट हुए जो ॐ के तेज में एकाकार हो गए ।

यह वैदिक तेज ही आदित्य है जो विश्व का अविनाशी कारण है । ये वेद स्वरूप सूर्य ही सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार के कारण हैं । ब्रह्मा जी की प्रार्थना पर सूर्य ने अपने महातेज को समेट कर स्वल्प तेज को ही धारण किया ।


सृष्टि रचना के समय ब्रह्मा जी के पुत्र मरीच हुए जिनके पुत्र ऋषि कश्यप का विवाह अदिति से हुआ । अदिति ने घोर तप द्वारा भगवान सूर्य को प्रसन्न किया जिन्होंने उसकी इच्छा पूर्ति के लिए सुषुम्ना नाम की किरण से उसके गर्भ में प्रवेश किया । गर्भावस्था में भी अदिति चान्द्रायण जैसे कठिन व्रतों का पालन करती थीं ।

ऋषि राज कश्यप ने क्रोधित होकर अदिति से कहा – ‘तुम इस तरह उपवास रखकर गर्भस्थ शिशु को क्यों मारना चाहती हो”

यह सुनकर देवी अदिति ने गर्भ के बालक को उदर से बाहर कर दिया जो अपने अत्यंत दिव्य तेज से प्रज्वलित हो रहा था । भगवान सूर्य शिशु रूप में उस गर्भ से प्रकट हुए । अदिति को मारिचम – अन्डम कहा जाने के कारण  यह बालक मार्तण्ड नाम से प्रसिद्ध हुआ । ब्रह्मपुराण में अदिति के गर्भ से जन्मे सूर्य के अंश को विवस्वान कहा गया ।

आयुष्य, आरोग्य, ऐश्वर्य और कीर्ति की उत्तरोत्तर वृद्धि के लिए रविवार को श्री सूर्य देव जी के मंत्रों का जाप, इसी मन्त्र से ताम्र पात्र में जल भरकर अर्ध्य देना चाहिये । तथा जमीन पर जल न गिरे इसलिए नीचे दूसरा ताम्र पात्र रखें और निम्न मन्त्र को 108 बार जाप करने से घर में सुख-शान्ति, समृद्धि का सुयोग बनता है ।

                  मन्त्र :- ॐ घृणि सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।

मानव शरीर रासायनिक तत्वों का बना है। सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भण्डार है। मनुष्य सूर्य के जितने अधिक सम्पर्क में रहेगा उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा।जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिडकियों से बन्द करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं।

जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत: मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं।


शरीर को कुछ ही क्षणों में झुलसा देने वाली गर्मियों की प्रचंड धूप से भले ही व्यक्ति स्वस्थ होने की बजाय उल्टे बीमार पड जाए लेकिन प्राचीन ग्रंथ अथर्ववेद में सबेरे धूप स्नान हृदय को स्वस्थ रखने का कारगर तरीका बताया गया है। उसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति सूर्योदय के समय सूर्य की लाल रश्मियों का सेवन करता है उसे हृदय रोग कभी नहीं होता।

सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं ‘कृमियों’ को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है। सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी रश्मियों द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है, किन्तु ज्यादातर लोग अज्ञानवश अन्धेरे स्थानों में रहते है और सूर्य की शक्ति से लाभ नहीं उठाते।

अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है। प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है।

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